रुडकी, जून 19 -- रुड़की, कार्यालय संवाददाता। आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में गोमूत्र अर्क (काउ यूरिन डिस्टिलेट) में ऐसे जैव-सक्रिय तत्वों की पहचान की है, जो चिकनगुनिया वायरस की वृद्धि को रोकने में प्रभावी पाए गए हैं। यह शोध पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर आधारित है। आईआईटी रुड़की के जैव विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग की प्रो. शैल्ली तोमर और उनकी टीम की ओर से किए गए इस अध्ययन के परिणाम प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका एसीएस एग्रीकल्चरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं। शोध में उन्नत वायरोलॉजी, मेटाबोलोमिक्स, मॉलिक्यूलर डॉकिंग और जैव-रासायनिक तकनीकों का उपयोग किया गया। यह भी पढ़ें- गौमूत्र अर्क में मिले चिकनगुनिया वायरस रोकने वाले तत्व

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