समस्तीपुर, फरवरी 28 -- होमियोपैथ की प्रमुख दवा-नक्सवोमिका यानी कोचिला के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। जिस पेड़ के फलों से एलोपैथ एवं आयुर्वेद की सैकड़ों दवाएं तैयार की जाती है। यह दुर्लभ वृक्ष 'कोचिला' लुप्त होने के कगार पर पहुंंच गया है। जिस कोचिला नामक वृक्ष के फलों के लिए विश्व की तमाम दवा कंपनियां खाक छानती हैं। उसके घने वन पटोरी प्रखंड के गोरगामा गांव में अपनी वजूद को संरक्षित करने का इंतजार कर रहे हैं। पटोरी प्रखंड के गोरगामा गांव में अवस्थित कोचिलवन में दो दशक पूर्व लगभग 2000 वृक्षों की जगह अब मात्र एक दर्जन वृक्ष ही शेष बचे हैं। अगर राज्य के इस अनुपम धरोहर को शीघ्र संरक्षित करने के लिए कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले कुछ वर्षों में कोचिलवन से कोचिला नामक दुर्लभ वृक्ष का नामो-निशान मिट जाएगा। इधर कई सालों से देखने को मिल रहा है कि इ...