लखनऊ, जून 5 -- गोमती नदी का पानी मौजूदा समय में पीना तो दूर हाथ धोने लायक भी नहीं बचा है। मल प्रदूषण यानी टोटल कोलीफार्म मानक से 26 गुना अधिक हो गया है। यानी सीवर का पानी सीधे नदी में पहुंच रहा है। नालों का पानी नदी में सीधे जाने से रोकने के सभी उपाय विफल रहे। इससे पिछले 10 वर्षों में प्रदूषण घटने के बजाय काफी बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में जलीय जीवों का इस जल में जीवित हर पाना संभव नहीं है। 'निर्मल' गोमती के लिए विभागों की कार्रवाई सिर्फ पानी की जांच तक ही सिमट कर रह गई है। गोमती नदी सीतापुर से निकलकर वाराणसी में गंगा नदी में मिल रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक सीतापुर में पानी की गुणवत्ता बहुत अच्छी है। यहां नदी के जल में घुलित आक्सीजन (डीओ) की मात्रा 8.20 मिलीग्राम/लीटर है (मानक: 6.5-8.0 मिग्रा प्रति लीटर), जो 10 साल स...