गोपालगंज, अप्रैल 30 -- कुचायकोट।रसोई गैस की किल्लत अब केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर विवाह, श्राद्ध और अन्य सामाजिक आयोजनों पर भी साफ तौर पर दिखने लगा है। गैस सिलेंडर की अनियमित आपूर्ति और बढ़ती कीमतों के कारण लोग मजबूरी में फिर से पारंपरिक ईंधन-लकड़ी, कोयला और उपले-की ओर लौट रहे हैं।

शादी-ब्याह का मौसम ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों शादी-ब्याह का मौसम चल रहा है, लेकिन आयोजकों के सामने भोजन व्यवस्था बड़ी चुनौती बन गई है। पहले जहां बड़े आयोजनों में गैस सिलेंडर के जरिए आसानी से भोजन तैयार हो जाता था, वहीं अब गैस की कमी के चलते लोग पुराने तरीकों को अपनाने को विवश हैं। बड़े कढ़ाहों के नीचे अब लकड़ी और कोयले के चूल्हे जलते नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार सरकार की ओर से 45 दिन में एक बार गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने ...