समस्तीपुर, अप्रैल 12 -- समस्तीपुर। खाद्य फसलों की खेती में हर साल बढ़ती लागत के बावजूद किसानों को उनकी मेहनत के अनुरूप लाभ नहीं मिल पा रहा है। गेहूं उत्पादक किसानों का कहना है कि खेत से फसल तैयार होने के समय उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल रहा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के 'धरती पुत्रों की व्यथा' अभियान के तहत किसानों ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि सरकारी स्तर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अनाज खरीद की व्यवस्था काफी कमजोर है। इसका फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं, जबकि किसानों को उनकी लागत भी निकालना मुश्किल हो रहा है। किसानों के मुताबिक खेती में खाद, बीज, जोताई, सिंचाई, मजदूरी और ढुलाई जैसी लागत लगातार बढ़ रही है। पिछले वर्ष जहां प्रति एकड़ गेहूं की खेती में लगभग 15 हजार रुपये खर्च हो...