अररिया, जनवरी 23 -- भरगामा । निज संवाददाता पिछले वर्ष मक्का की खेती में नुकसान झेलने के बावजूद भी सोने जैसी चमक रखने वाली गेहूं की फसल क्षेत्र के किसानों को खास आकर्षित नहीं कर पाई। इस बार भी क्षेत्र के अधिकांश किसानों का रुझान गेहूं के बजाय मक्का की खेती की ओर ही बना रहा। हालांकि क्षेत्र प्रगतिशील किसानों को उम्मीद थी की मौसम के बदले मिजाज का असर इस बार फसल चयन पर पड़ेगा और निर्धारित लक्ष्य अधिक क्षेत्र में गेहूं की बुआई होगी लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत रही। कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष गेहूं की बुआई लक्ष्य से ज्यादा नहीं हुई है। नगदी की त्वरित जरूरत के कारण किसान एक बार फिर मक्का को प्राथमिकता देते नजर आए। यूं तो आम आवाम की थाली के महत्वपूर्ण अव्यवन बन चुके गेहू्र की खेती के लिए भरगामा एवं आसपास का इलाका काफी मुफीद माना जाता...