जमशेदपुर, मई 25 -- श्री गणिनाथ मंदिर गोलमुरी में नारी जागरण समिति की ओर से आयोजित नानी बाई रो मायरो के दूसरे दिन वृंदावन से पधारे कथा वाचक श्री मुकुंद कृष्ण शर्मा ने व्यास पीठ से कहा कि जैसे पनिहारिन सिर पर पानी का घड़ा रहते हुए भी अन्य काम कर लेती है, फिर भी उसका ध्यान घड़े से नहीं हटता। इस तरह गृहस्थ जीवन में लिप्त रहते भी ईश्वर में चित्त लगा रहना चाहिए। श्री कृष्ण के परम भक्त नरसी मेहता 15वीं शताब्दी में जूनागढ़ गुजरात में जन्मे थे। बचपन में माता-पिता के देहांत बाद बड़े भाई भाभी ने भरण-पोषण किया। नरसी जी बचपन से ही अत्यंत शांत सरल और श्री कृष्ण के भक्त थे। यह भी पढ़ें- माता-पिता के चरणों में ही सारे तीर्थ : गंगोत्री तिवारी घर की डांट से दुखी होकर जंगल में पुराने शिव मंदिर तपस्या भी की थी, जहां उन्होंने श्री कृष्ण भक्ति का वर मांगा। नरस...