अयोध्या, अप्रैल 7 -- अयोध्या। सत्संग समिति, गोरखपुर द्वारा रामसेवक पुरम स्थित विहिप यात्री निवास में आयोजित श्री भागवत कथा महोत्सव में सुप्रसिद्ध कथा व्यास आचार्य इंद्रेश ने कहा.. जो जिम्मेदार होता है उसको ही समझना चाहिए। महारास के प्रसंग को व्याख्यायित करते हुए उन्होंने कहा कि पत्नी के द्वारा पति का किसी हालत में त्याग नहीं होना चाहिए । पति चाहे गरीब हो रोगी हो क्रोधी हो या कैसा भी हो पर उसका साथ नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो ईश्वर यज्ञ तप दान सहित बड़ी कठिनाई से प्राप्त होता है।वही ईश्वर स्त्री को पति को भगवान मान कर सेवा करने से प्राप्त हो जाता है। स्त्री के लिए पति के अलावा किसी को छू कर प्रणाम नहीं करना चाहिए । अपने परिवार की सेवा ही धर्म है। उन्होंने कहा कि आखिर स्त्री को ही क्यों समझाया जाता है, ज्यादा देख रेख में रखा जाता ...
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