हरिद्वार, जून 24 -- सनातन संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा केवल ज्ञान के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को संस्कारित करने की आधारशिला है। गुरु के सान्निध्य में प्राप्त शिक्षा ही समाज को सही दिशा देती है। यह विचार महानिर्वाणी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती महाराज ने बुधवार को भूपतवाला स्थित अखंड दयाधाम में आयोजित संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज के संयोजन में आयोजित संत सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए स्वामी विशोकानंद भारती महाराज ने कहा कि स्वामी भास्करानंद महाराज ने अपने गुरुजनों की स्मृति में अखंड दयाधाम की स्थापना कर गुरु भक्ति का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्य अतिथि अटल अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विश्वात्मानंद म...