बागपत, अगस्त 11 -- बड़ौत। अजितनाथ सभागार मंडी में प्रवचन के दौरान आचार्य आर्जव सागर महाराज ने कहा कि गुरु चलते-फिरते तीर्थ हैं, जो मोक्षपथ की राह दिखाते हैं। देव, शास्त्र और गुरु सम्यकदर्शन प्राप्त करने के निमित्त हैं। जिस प्रकार कुम्हार, चाक आदि होने के बावजूद चिकनी मिट्टी के बिना घड़ा नहीं बन सकता, उसी प्रकार सम्यकदर्शन के लिए भव्यता, जागृति और धर्म के प्रति रुचि आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिन्हें धर्म की बात सुनने में रुचि होती है, रत्नत्रय प्राप्त करने की लालसा रहती है और गुरु का सान्निध्य अच्छा लगता है, वे भव्य आत्माएं हैं। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि 12-13 सितंबर को दो दिवसीय आध्यात्मिक राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर मुकेश जैन, महेंद्र जैन, जितेंद्र जैन, राकेश जैन, प्रदीप जैन आदि मौजूद रहे।

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