नई दिल्ली, दिसम्बर 4 -- देवगुरु बृहस्पति के इस गोचर का राष्ट्र पर भी व्यापक प्रभाव दिखाई देगा। स्वतंत्र भारत की कुंडली में लग्न के अनुसार देखा जाए तो देवगुरु बृहस्पति अष्टम एवं लाभ भाव के कारक होकर के धान भाव में गोचर आरंभ करेंगे। जहां से बृहस्पति की दृष्टि षष्ट भाव, अष्टम भाव एवं दशम भाव पर होगा। परिणाम स्वरुप राष्ट्र के आंतरिक शत्रुओं में वृद्धि की स्थिति बनेगी। पड़ोसियों से टकराव की स्थिति बनेगी। क्योंकि बृहस्पति के मिथुन राशि में प्रवेश करते ही राहु की पंचम दृष्टि बृहस्पति पर होगा। परिणाम स्वरुप बृहस्पति जो कि धर्म, धार्मिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थाओं, सनातन धर्म एवं किसी भी धर्म के बड़े संस्थान, सभ्यता संस्कृति का मुख्य कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में बृहस्पति पर राहु की दृष्टि पढ़ने से इनमें विकृति उत्पन्न होगी। सभी 12 राशियों पर इस ग...