शाहजहांपुर, मार्च 1 -- मुमुक्षु आश्रम में चल रही श्रीरामकथा के पांचवें दिन कथाव्यास विजय कौशल ने राम जन्म प्रसंग और भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कथा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मन और चरित्र को शुद्ध करने का माध्यम है। गुरु की कृपा से ही ईश्वर के साक्षात दर्शन संभव होते हैं। कथाव्यास ने कैलाश पर भगवान शिव और पार्वती संवाद का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि पार्वती ने प्रभु की लीला के दर्शन की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद शिव और पार्वती वेश बदलकर बृजधाम पहुंचे और कृष्ण की रासलीला में सम्मिलित हुए। बंसी की धुन पर शिव भावविभोर होकर नृत्य करने लगे। भेद खुलने पर कृष्ण मुस्कुराए। इसके बाद दोनों कैलाश लौट गए। विजय कौशल ने कहा कि "कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा" के अनुसार प्रभु नाम स्मरण से उद्धार संभव है। राम जन्म क...