मुजफ्फर नगर, जुलाई 16 -- खतौली। बुधवार को दिगम्बर जैन मंदिर, जक्की वाला में आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री 108 अनुपम सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को गुरु-शिष्य परंपरा के आध्यात्मिक महत्व बताया। गुरुदेव ने कहा कि जब तक गुरु की कृपादृष्टि और संरक्षण शिष्य पर बना रहता है, तब तक उसका जीवन सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ता है। संसार में अनेक लोग ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं, परंतु सही दिशा वही प्राप्त करता है, जिसे योग्य गुरु का सान्निध्य मिलता है। गुरु केवल शास्त्रों का ज्ञान नहीं कराते, बल्कि वे जीवन जीने की कला सिखाते हैं। गुरु अज्ञान के अंधकार को दूर कर आत्मा में ज्ञान का दीप प्रज्वलित करते हैं। शिष्य का प्रथम कर्तव्य गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा, विनय और समर्पण रखना है। जहाँ श्रद्धा होती है, वहाँ ज्ञान स्वतः उतरता है; जहाँ अहंकार होता है, वहाँ ज्ञान ...