नई दिल्ली, सितम्बर 1 -- हेमलता कौशिक दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि पति सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपनी पत्नी का गुज़ारा-भत्ता देने की जिम्मेदारी से बचने के लिए शादी से जुड़े उस विवाद को फिर से नहीं खोल सकता, जिसका फ़ैसला पहले ही हो चुका है। जस्टिस सौरभ बनर्जी की पीठ ने यह बात एक पति की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए कही। पति ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अपनी पत्नी को गुज़ारा-भत्ता देने का निर्देश दिया गया था। दोनों की शादी 2002 में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। 2003 में पति ने यह घोषणा करवाने के लिए मुकदमा दायर किया कि वह अविवाहित है। महिला को अपनी पत्नी होने का दावा करने से रोकने के लिए रोक की मांग की। शुरुआत में मुकदमा उसके पक्ष में तय हुआ। हालांकि पत्नी ने इस फैसले के खिलाफ अपील की, जिसे 2006 में मंज़ूरी मिल ग...