वाराणसी, जून 8 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। आनंद कानन गुरुकुल की गीत-संगीत और नृत्य-कला कार्यशाला ने संत रविदास पार्क की रंगत ही बदल दी। यहां घुंघरू की झंकार, कैनवास पर रंगों संग तूलिकाओं की थिरकन और सात सुरों की अलाप ने हर उम्र को आकृष्ट करता है। बच्चे-बूढ़े और युवक-युवतियां यहां बड़े मनोयोग से कला निखारने में व्यस्त हैं। उनके जोश-उमंग ने सिखाने वालों को उर्जित किया है। यही वजह है कि वे समय की बाध्यता का ख्याल किए बिना साधकों को सबकुछ दे देना चाहते हैं। प्रेमी युगलों के जमावड़े के लिए चर्चित संत रविदास पार्क का कलेवर बदलने का सामूहिक प्रयास काबिलेतारीफ है। नृत्य, तबला, गायन, चित्रकला और नाटक में पारंगत गुरुओं ने यहां डेरा बनाया। प्रण किया कि इसे साधकों की तीर्थस्थली बनाएंगे। कहने में संकोच नहीं कि उनका संकल्प फलीभूत होने लगा है। पार्क के...