संभल, मई 3 -- हयातनगर के चामुंडा के मंदिर के निकट गीता ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। यज्ञ के दूसरे दिन गीता व्यास स्वामी कृष्णानंद ने श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 2, 3 और 4 पर आधारित गहन प्रवचन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अर्जुन को कुरुक्षेत्र में मोह और भ्रम ने घेर लिया था। आज वही स्थिति समाज के अनेक लोगों की हो गई है। केवल स्वयं को सनातनी कहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन में सनातन मूल्यों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इच्छाओं के पीछे चलने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे सही-गलत का भेद भूल जाता है और पतन की ओर बढ़ता है।

प्रवचन का महत्व प्रवचन में उन्होंने आत्मा के स्वरूप को समझाते हुए कहा कि मनुष्य शरीर नहीं, बल्कि आत्मा है। आत्मा न जन्म लेती है और न ही मरती है। वह केवल शरीर बदलती है। सभी जीव एक ही परमात्मा के अंश हैं। ...