कानपुर, जुलाई 13 -- कानपुर। चिन्मय मिशन के गीता पंचामृत आयोजन में स्वामी प्रबुद्धानंद ने सोमवार को कहा कि साधक को कोशिश करनी चाहिए कि ऐसा जीवन जिए जिससे नैतिक मूल्यों से उसका जीवन भर जाए। जीवन में जो भी विकृतियां आती हैं, जो व्यसन व्यक्ति के अंदर पैदा हो जाते हैं, जो गलत आदतें आ जाती हैं, यदि वह व्यक्ति गीता का स्वाध्याय करें तो वह दूर हो सकते हैं। स्वयं का कल्याण व्यक्ति को स्वयं ही करना होगा। स्वयं का उद्धार तभी कर सकते हैं जब उसे कुछ दृष्टि प्राप्त हो जाए और यह दृष्टि तभी प्राप्त होती है जब व्यक्ति ने सत्संग किया हो। यह भी पढ़ें- Bhabua News: मन पर विजय के बिना नहीं मिल सकती मुक्ति मन का नियंत्रण गीता का एक मूलभूत उपदेश है। यहां प्रमुख रूप से स्वामी राघवानंद, ब्रह्मचारी भगवती चैतन्य, बी एस श्रीवास्तव, विनोद मिश्रा, प्रदीप श्रीवास्तव, व...