नई दिल्ली, फरवरी 5 -- सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि पुलिस अधिकारियों को ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करना ही होगा, जिनमें सात साल तक की कैद की सजा हो सकती है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि किसी पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी सिर्फ़ एक कानूनी अधिकार है, जिसका मकसद जांच में मदद करना है और इसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता। न्यायालय इस मुद्दे की जांच कर रहा था कि क्या सात साल तक की सजा वाले सभी मामलों में धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करना अनिवार्य है। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि सात साल से कम कारावास की सजा वाले अपराधों के लिए तब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की जा सकती, जब तक कि BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.