औरंगाबाद, फरवरी 28 -- होली के मौके पर गांवों में गई जाने वाली होली कुछ हद तक विलुप्त हो रही है। परंपरागत होली गीतों की जगह अब फिल्मी गाने ले रहे हैं। हालांकि कई गांवों में अभी भी होली की पुरानी परंपरा जारी है। फाल्गुन महीने की शुरुआत के साथ ही रात में सार्वजनिक जगह पर बैठकर होली गई जा रही है। इसमें परंपरागत पुराने फगुआ गीत शामिल हैं। गौरा झमाझम पानी भरे.. से लेकर पनिया लाले लाल, ए गौरा हमरो के चाहीं.. और होली खेले रघुवीरा गाए.. जा रहे हैं। इसी तरह होली है रसिया और एक हाथ से धोती पहने, दो हाथ लपेटा जैसे भगवान शिव को समर्पित होली गीत गाए जा रहे हैं। इन होली गीतों में भगवान शिव की होली, भगवान कृष्ण और अन्य देवी देवताओं का जिक्र भी हो रहा है। सरयू तट पर खेले होली.. के बोल भी गाए जा रहे हैं। माहौल बदला है लेकिन इसके बावजूद पुराने फगुआ गीतों को...