गांधी जैसे महामानव की जरूरत
नई दिल्ली, सितम्बर 26 -- अगले सप्ताह हम गांधीजी की 157वीं जयंती मनाने जा रहे हैं। क्या आपको नहीं लगता कि इस धुंधलाए वक्त में वह पहले के मुकाबले कहीं अधिक याद आने लगे हैं? ऐसा लगता है कि संसार का समूचा निजाम ध्वस्त हो चला है। 50 से अधिक देश खूनी संघर्षों के शिकार हैं। विश्व की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति अमेरिका अपने धनी-मानी दोस्त देशों के साथ अपेक्षाकृत छोटे देश ईरान से भिड़ा पड़ा है। सबल प्रतिरोध की वजह से अमेरिकी नाकाम हो रहे हैं। उन्हें जंग से उबरने का बहाना नहीं सूझ रहा। समूची दुनिया इस रबड़ की तरह खिंचते संघर्ष से आर्थिक दुश्वारी में फंस गई है। जिस 'ग्लोबल विलेज' के सपने को अमेरिका ने जतन से गढ़ा था, खुद उसी ने उसे ध्वस्त कर दिया है। एक समय, संयुक्त राज्य अमेरिका का नाम सुनते ही समन्वयवाद का एहसास होता था। एक ऐसा मुल्क, जहां आकर कोई भी अपने ख...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.