प्रयागराज, अगस्त 29 -- प्रयागराज। आवारा कुत्ते हर माह सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। मरीजों में कई ऐसे भी रहते हैं, जिनके गर्दन व चेहरे के आसपास कुत्तों के काटने पर घाव हो जाता है। बेली अस्पताल के एंटी रैबीज अनुभाग के प्रभारी डॉ. स्वतंत्र सिंह ने बताया कि अनुसार कुत्तों के काटने पर यदि ज्यादा जख्म हो गया है और खून निकल आया है तो सामान्य एंटी रैबीज के इंजेक्शन के साथ इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन लगवाना जरूरी है। क्योंकि कुत्ते के काटने वाली जगह मस्तिष्क के जितना करीब होगा रैबीज का संक्रमण उतना ही तेजी के साथ होता है। बच्चों का कद छोटा होने से चेहरे और आसपास कुत्ते अधिक काटते हैं। लेकिन समस्या यह है कि इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। इसलिए मरीज इम्युनोग्लोबुलिन का इंजेक्शन या तो निजी अस्पताल में लगवाते हैं या पी...