कुशीनगर, जुलाई 11 -- कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। बेहतर नौकरी और एक हजार डॉलर प्रतिमाह वेतन का सपना लेकर म्यांमार पहुंचे कुशीनगर के दो युवकों और बिहार निवासी उनके साथी की तीन महीने की लंबी कैद आखिरकार खत्म हो गई। लेकिन, यह रिहाई किसी सरकारी कार्रवाई या बचाव अभियान से नहीं, साइबर गिरोह को प्रति युवक 3.80 लाख रुपये मिलने के बाद हुई। परिवारों ने गहने बेचकर और दोस्तों से चंदा जुटाकर यह रकम भेजी, तब जाकर छह जुलाई को तीनों युवकों का पासपोर्ट लौटाकर साइबर ठगों ने उन्हें म्यावड्डी शहर में छोड़ दिया। तीनों युवक अब म्यावड्डी शहर में एनजीओ के सेफ हाउस में सुरक्षित हैं, लेकिन भारत लौटने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं बचे है। ऐसे में युवक दूतावास से गुहार लगा रहे हैं कि किसी तरह उनकी वतनवापसी कराई जाए। यह भी पढ़ें- चावल और नमक-सोयाबीन खिलाकर रखते थे आरोपी...