प्रयागराज, जनवरी 24 -- मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रीतमदास प्रेक्षागृह में आयोजित तीन दिवसीय ऑन्कोपैथोलॉजी कार्यशाला के अंतिम दिन शनिवार को विशेषज्ञों ने पैथोलॉजी की नवीनतम तकनीक और कैंसर के निदान पर विचार व्यक्त किए। मुंबई के डॉ. सुमित गुजराल ने कहा कि गले की हर गांठ कैंसर नहीं होती है। इसके लिए बायोप्सी जांच व लम्फोमा की पुष्टि करना जरूरी होता है। पहले गले की गांठ को टीबी मानकर इलाज किया जाता था। एमएलएन मेडिकल कॉलेज में 50 रुपये में बायोप्सी जांच की जाती है। टाटा मेमोरियल अस्पताल की डॉ. असावरी पाटिल ने कहा कि इम्युनोहिस्टोकैमिस्ट्री के माध्यम से कैंसर के प्रकार की पहचान और समय से इलाज आसान हो गया है। उन्होंने कहा कि स्तन कैंसर को लेकर शहरी क्षेत्र की महिलाओं में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी शर्म के कारण कुछ म...