नई दिल्ली, अक्टूबर 28 -- 'स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन पर 10वीं लैंसेट काउंटडाउन रिपोर्ट' के अनुसार, पेरिस समझौते के लागू होने के बाद के दशक (2016-2025) में जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव और जोखिम बढ़ गए हैं। इससे पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयास, समस्या की गति के साथ कदम नहीं मिला पाए हैं। बुधवार को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पेरिस समझौता लागू होने के बाद वैश्विक स्तर पर गर्मी से होने वाली मौतों के वार्षिक औसत में लगभग 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि केवल 2023 में ही गर्मी के कारण रिकॉर्ड 7,10,000 मौतें हुईं। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक मौत इंसानों द्वारा पैदा किए गए जलवायु परिवर्तन की वजह से थीं। यह भी पढ़ें- भारत भीषण गर्मी की मार झेलने वाले देंशों मेंगर्मी से होने वाली मौतो...