बदायूं, अक्टूबर 6 -- नगर के ज्वाला प्रसाद जैन स्कूल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक आचार्य रामचंद्राचार्य ने गर्भस्थ जीवन की रक्षा और संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। कहा, मनुष्य को जीवन ईश्वर की अमूल्य देन है। गर्भ में पल रहे जीव की हत्या करना महापाप है। ऐसे कर्म का जीवन में कोई सहज प्रायश्चित नहीं बताया गया है। आचार्य ने कहा कि समाज में बढ़ती स्वार्थ की प्रवृत्ति के कारण मनुष्य अपने कर्तव्यों और नैतिक मूल्यों को भूलता जा रहा है। हमें यह समझना होगा कि प्रत्येक जीवन का अपना महत्व है। गर्भस्थ शिशु भी जीवन का स्वरूप है, इसलिए उसकी रक्षा करना माता-पिता और समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में जल्दबाजी में ऐसा निर्णय नहीं लेना चाहिए, जिससे किसी निर्दोष जीवन का अंत हो जाए। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि...