लखनऊ, मार्च 28 -- महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए संशोधित मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम ने सुरक्षित गर्भपात को लेकर नई राह खोली है। इस कानून में गर्भपात की समय सीमा को विशेष परिस्थितियों में 24 सप्ताह तक बढ़ाया गया है, जिससे कई महिलाओं को राहत मिली है। यह जानकारी वात्सल्य संस्थान की डॉ. नीलम सिंह ने दी। शनिवार को विकासनगर के एक होटल में एससीएल फाउंडेशन की ओर से सुरक्षित गर्भपात और संशोधित एमटीपी अधिनियम विषय पर कार्यशाला हुई। डॉ. नीलम सिंह ने कहा कि पहले समय सीमा कम होने के कारण कई महिलाएं असुरक्षित तरीकों का सहारा लेती थीं। जिससे उनकी जान को खतरा रहता था। अब संशोधित प्रावधानों के तहत पीड़िता, नाबालिगों और गंभीर चिकित्सीय स्थितियों में गर्भपात की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि कानून में महिला की...