नई दिल्ली, जनवरी 21 -- गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का बहुत विस्तार से वर्णन किया गया है। इस पुराण के अनुसार, जब कोई आत्मा मृत्यु के बाद सामान्य रूप से अपने आगे के सफर पर नहीं बढ़ पाती, तो वह प्रेत योनि में भटकने लगती है। प्रेत योनि में आत्मा को भूख, प्यास, दुख और अशांति का कष्ट सहना पड़ता है। गरुड़ पुराण स्पष्ट रूप से बताता है कि कुछ खास कारणों से आत्मा प्रेत बन जाती है और वह अपने परिवार या घर के आसपास ही भटकती रहती है। ऐसी आत्मा परिवार को भी परेशान करती है, जिससे घर में अशांति, स्वास्थ्य समस्या, आर्थिक हानि और नकारात्मक घटनाएं बढ़ने लगती हैं। लेकिन सही और श्रद्धापूर्ण उपाय करने से ऐसी आत्मा को मुक्ति दिलाई जा सकती है और वह आगे की यात्रा पर निकल जाती है।प्रेत योनि में जाने के मुख्य कारण क्या हैं? गरुड़ पुराण में प्रेत यो...