गया, नवम्बर 14 -- जिले के चुनावी नतीजों ने महागठबंधन के लिए बड़ा झटका साबित किया है। कई चुनावों से जातीय आधारित मुस्लिम-यादव समीकरण पर भरोसा जताने वाले तेजस्वी यादव का जादू इस बार पूरी तरह फीका पड़ गया। जिले के 10 सीटों में से आठ पर एनडीए ने कब्जा जमा लिया, जबकि महागठबंधन सिर्फ बोधगया और टिकारी दो सीटों पर सिमट कर रह गया। जातीय गणित, स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की रणनीति इन तीनों मोर्चों पर महागठबंधन पिछड़ता दिखा। जनता ने इस बार जातीय कार्ड नहीं, बल्कि काम और उम्मीदवार की विश्वसनीयता को वोट दिया। महागठबंधन के लिए गया का परिणाम सीधा संदेश है। जनता हवा नहीं, हिसाब देख रही है। 2020 से 2025: राजद की जमीन खिसकी, एनडीए बना मजबूत खिलाड़ी 2020 में स्थिति बिल्कुल अलग थी। गया की 10 सीटों में पांच-पांच सीटें दोनों गठबंधनों के बीच बंटी थीं। लेकिन, ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.