गया, सितम्बर 21 -- गया जी सिर्फ पितृ तर्पण और पिंडदान का तीर्थ नहीं, बल्कि इसकी परंपराओं में धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक और खगोलीय पक्ष भी जुड़े हैं। गया कॉलेज के मुंशी प्रेमचंद सभागार में सोमवार को 'गया जी पितृ तीर्थ : धार्मिक, ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक आयाम' विषय पर आयोजित परिचर्चा में गया जी की पिंडदान परंपरा और मगध की विरासत के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। 360 पिंड वेदियों के खगोलीय और सांस्कृतिक महत्व को समझाया

कार्यक्रम का मुख्य वक्ता भारत विकास परिषद, दक्षिण बिहार प्रांत की अनुग्रहपुरी शाखा के आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. आनंद वर्धन ने गया जी की पितृ पूजा परंपरा की आध्यात्मिक और खगोलीय व्याख्या की। उन्होंने गया को मगध का मध्यबिंदु बताते हुए यहां की 360 पिंड वेदिकाओं को वृत्त के 360 अंशों से जोड़क...