नई दिल्ली, जून 19 -- चेक बाउंस के एक मामले में शिकायतकर्ता की छोटी सी गणितीय चूक आरोपी दंपती के लिए राहत बन गई। दिल्ली के द्वारका की जिला अदालत ने ब्याज की गलत गणना के आधार पर दाखिल मुकदमे में आरोपी दंपती रुक्साना और मेनुद्दीन को दोषमुक्त कर दिया। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास शिव कुमार की अदालत ने कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (एनआई) ऐक्ट की धारा 138 के तहत कार्रवाई तभी हो सकती है, जब चेक की रकम वास्तविक कानूनी देनदारी के बराबर या उससे कम हो। इस मामले में चेक की राशि देनदारी से अधिक पाई गई। यह भी पढ़ें- किसी को धमकाकर उससे एक रुपये लेना भी वसूली का अपराध : दिल्ली कोर्ट यह मामला वर्ष 2019 का है। शिकायतकर्ता रेणु देवी को किराये के मकान की तलाश थी। एक प्रॉपर्टी डीलर के माध्यम से उनकी मुलाकात रघुबीर नगर निवासी रुक्साना और उसके पति मेन...