नई दिल्ली, जनवरी 25 -- देश आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। यह अवसर है, अपने गौरवशाली अतीत के स्मरण का, स्वतंत्रता सेनानियों व संविधान रचयिता पूर्वजों के प्रति श्रद्धा जताने का और उन सभी कर्मयोगियों का आभार जताने का, जिन्होंने बीते 76 वर्षों में भारतीय गणराज्य को दुनिया की पहली कतार में पहुंचाने में अपना योगदान दिया है। यह सफर आसान नहीं रहा। एक गणतंत्र के रूप में हमने जब अपना पहला कदम बढ़ाया था, तब देश की आबादी करीब 36 करोड़ थी, आज यह 140 करोड़ से ऊपर है। तब सदियों के शोषण और दमन से मुक्त हुए देश ने लगभग शून्य से शुरुआत की थी। हमारे कर्णधारों के सामने 36 करोड़ लोगों को दो वक्त भरभेट भोजन मुहैया कराने की गंभीर चुनौती थी। देश बंगाल के दुर्भिक्ष को भूला न था। इसलिए सरकार ने अनाज के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया। भाखड...