नई दिल्ली, फरवरी 26 -- यह जून का समय नहीं, बल्कि फरवरी का महीना है और बिहार की अधिकतर नदियां सूख चुकी हैं। कभी जहां नावें चला करती थीं, अब वहां सिर्फ बालू के टीले हैं। नवादा से लेकर नालंदा तक, भभुआ से लेकर बेगूसराय तक, नदियां सिमटकर नाले में तब्दील हो गई है। सोन, गंगा और गंडक जैसी बड़ी नदियां भी अपनी चौड़ाई खो रही हैं। यह संकेत है कि अगर अभी नहीं संभले, तो आने वाला कल और सूखा होगा। नवादा की खुरी हो या नालंदा की पंचाने, भोजपुर की धर्मावती या फिर भभुआ की कर्मनाशा... तमाम नदियां अब बस नाम की रह गई हैं। सारण की दाहा नदी जो 96 किलोमीटर लंबी थी, लेकिन आज उसकी धारा तक मिट गई है। क्या यह सिर्फ जलवायु परिवर्तन है या हमारी लापरवाही ने नदियों का यह हाल किया है। अगर अभी से ठोस जल संरक्षण, गाद सफाई और नदी पुनर्जीवन की पहल नहीं हुई, तो गर्मी आते-आते यह...
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