अलीगढ़, दिसम्बर 25 -- (सवालों में अस्पताल) अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण व्यवस्था इन दिनों एक अजीब विरोधाभास से जूझ रही है। दफ्तरों में बैठे-बैठे क्लीनिकों को 'हाइजीन टेस्ट' में पास कर दिया जाता है, जबकि जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। कई मामलों में क्लीनिक मौके पर जाकर देखने के बजाय संचालकों को कार्यालय बुलाकर कागजों के आधार पर मुहर लगा दी जाती है। हाइजीन, बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण और स्टाफ की योग्यता, सब कुछ फाइलों में दुरुस्त दिखा दिया जाता है। यही कारण है कि गांवों में गंदगी के बीच इलाज का खतरनाक खेल जारी है। इगलास, अतरौली, गंगीरी, छर्रा, लोधा सहित देहाती इलाकों में हर प्रमुख मार्ग पर ऐसे क्लीनिक खुले मिल जाएंगे, जहां न सफाई का मानक है, न संक्रमण से बचाव की व्यवस्था। गंदे फर्श, खुले कूड़ेदान, बिना ढक्कन की सुई-सी...