कुशीनगर, अगस्त 31 -- गंगेश्वर त्रिपाठी पडरौना। बड़ी गंडक नदी किनारे रेत पर पड़ी ये चप्पलें किसी दुकान की नहीं हैं। न ही इन्हें किसी ने यहां उतारकर रखा है। ये नदी के साथ बहकर आईं हैं। कुछ जोड़ी में हैं, कुछ की जोड़ीदार का पता नहीं। किसी पर कीचड़ की मोटी परत है तो कोई रेत में आधी दबी पड़ी है। इन्हें देखकर बरबस यही सवाल उठता है कि आखिर इन चप्पलों में चलने वाले कदम कहां गए? यह भी पढ़ें- नदी में बहकर आई लकड़ियां पकड़ने को जान जोखिम में डाल रहे ग्रामीणजलप्रलय के बाद की स्थिति छितौनी तटबंध के आसपास गंडक का किनारा इन दिनों ऐसे ही सवालों से भरा है। नेपाल में बुधवार को आई भीषण जलप्रलय के बाद बड़ी गंडक (नारायणी) की धार अपने साथ वहां की तबाही के निशान लेकर हर दिन सीमा पार पहुंच रही है। पहले लकड़ियां और घर-गृहस्थी का सामान आया, फिर कपड़े-बर्तन और दूसर...