बरेली, अगस्त 24 -- श्री रामायण मंदिर में माधोबाड़ी में राम तत्व दर्शन के तीसरे दिन प्रेम रसिक श्वेताभ महाराज ने गौ सेवा, कांवड़ यात्रा और गंगा स्नान के आध्यात्मिक अर्थ समझाए। उन्होंने कहा कि गौ सेवा केवल बाहरी सेवा नहीं, बल्कि अंत:करण की शुद्धि और भक्ति बढ़ाने का माध्यम है। कांवड़ यात्रा भी सिर्फ जल चढ़ाने की परंपरा नहीं, बल्कि मन की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का साधन है। उन्होंने कहा कि केवल गंगा स्नान से मुक्ति संभव होती तो सभी मुक्त हो जाते। गंगा का वास्तविक अर्थ भगवदीय ज्ञान की ओर गमन करना है। यह भी पढ़ें- शरणागत भक्त के योग-क्षेम का भार भगवान स्वयं उठाते हैं : जीयर स्वामी

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