वाराणसी, अक्टूबर 31 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। बाढ़ के बाद घाटों पर जमा मिट्टी को पुन: गंगा में ही बहाना नदी की सेहत के लिए घातक होगा। भविष्य में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यह कहना है देश के प्रख्यात पर्यावरणविद् पद्मभूषण डॉ.अनिल प्रकाश जोशी का है। वह शुक्रवार को काशी में नमामि गंगे गंगा विचार मंच के पदाधिकारियों के साथ बीएचयू के एलडी गेस्ट हाउस में काशी में गंगा की चुनौतियों पर विचार-विमर्श कर रहे थे। डॉ.जोशी ने कहा कि कोई भी नदी बहाव में अपने साथ रेत, गाद अथवा मिट्टी लेकर आती है। यह स्वाभाविक है। इसे पूर्ण रूप से वापस उसी नदी में बहाने से गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। स्थानीय जिला प्रशासन को इसपर वैज्ञानिक अध्ययन करने की जरूरत है। एक सीमित मात्रा में गाद का गंगा में होना भूगर्भ जल बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। वहीं गाद की मात्रा ...