नई दिल्ली, जून 18 -- गंगा में बढ़ती गर्मी और घटती ऑक्सीजन चिंता का विषय बन गई है। इससे गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र, जलीय जीवन और इस पर निर्भर करोड़ों लोगों की आजीविका पर खतरा बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन, कम बारिश, घटता जल प्रवाह, ग्लेशियरों में सिकुड़न और नदी किनारे हरियाली की कमी इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। आईआईआईटी हैदराबाद के हाइड्रोक्लाइमेटिक रिसर्च ग्रुप और कुछ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के शोध के अनुसार, गंगा के मध्य प्रवाह क्षेत्र में 2009 से 2025 के बीच पानी का औसत तापमान करीब 1.88 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। आईआईआईटी हैदराबाद की वैज्ञानिक डॉ. रेहाना शैक ने बताया कि तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने पर पानी में ऑक्सीजन घुलने का स्तर घट सकता है। यह ऑक्सीजन मछलियों, जलीय कीटों और बाकी जीवों के लिए जीवनदायी होती है।

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