गंगा दशहरा : 'गंगाजल जो चाहे पी ले, मज़हब पहरेदार कहां है...'
वाराणसी, मई 27 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। सुबह-ए-बनारस आनंद कानन के साहित्यिक प्रकल्प काव्यार्चन की 62वीं कड़ी में मंगलवार को नगर के रचनाकारों ने मां और बेटी से लेकर गंगा मां तक को समर्पित रचनाओं का पाठ किया। वरिष्ठ शायरा डॉ. शबनम खातून 'हफीज' की अध्यक्षता में हुए इस सत्र में पढ़ी गई रचनाओं में समाज की अन्य विसंगतियों पर भी गीतों, गजलों और कविताओं की प्रस्तुति हुई। यह भी पढ़ें- गंगा दशहरा : कजरी-सोहर गाकर मनाया पर्व काव्यपाठ का आरंभ अध्यक्षीय काव्यपाठ में डॉ. शबनम खातून 'हफीज' ने जिंदगी के अलग-अलग मसलों को अपने शेरों में बखूबी बयान किया। उनके शेर 'जिंदगी ठहरती है तो खत्म हो जाती है, जैसे रुके पानी में महक आ जाती है' ने जिंदगी की रवानी पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं के प्रति बदनीयती रखने वालों को चेतावनी देते हुए सनुाया 'लोग आसां न समझें ...
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