भदोही, सितम्बर 25 -- सीतामढ़ी, हिन्दुस्तान संवाद। काशी-प्रयाग के मध्य पवित्र सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी स्थित महर्षि बाल्मीकि गंगा घाट पर खड़ा होना मुश्किल हो गया है। शाम ढलते ही कीटों का इतना प्रकोप बढ़ जाता है कि लोगों का बाहर बैठना तक दुभर हो जाता है। गंगा का जल स्तर कम होने से तट पर पूरा कीचड़ जमा हो गया है। इससे उठने वाला दुर्गंध लोगों का इधर खड़ा होना दुश्वार कर दिया है। महर्षि वाल्मीकि आश्रम की पावन धरा इन दिनों जिम्मेदारों की घोर उपेक्षा का दंश झेल रही है। गंगा के जलस्तर में आ रहा लगातार गिरावट के बाद महर्षि वाल्मीकि गंगा घाट की जो तस्वीर सामने आ रही है, वह आस्थावानों के मन को झकझोर देने वाली है। गंगा की धारा पक्की सीढ़ियों को छोड़कर काफी दूर खिसक चुकी है और पीछे छोड़ गई है जानलेवा दलदल, कीचड़ और असहनीय बदबू। हालात इतने बदतर है कि दूर-दराज क...