हापुड़, अप्रैल 2 -- गंगानगरी में फव्वारा चौक पर लगी डॉल्फिन की आकृति अब कचरे के ढेर में होने से शोपीस बन गई है। वन विभाग ने करीब दो लाख की लागत से आकृति लगाई थी। विभाग का माना था कि इस आकृति के माध्यम से श्रद्धालुओं को गंगा स्वच्छता का संदेश दिया जा सकेगा। गंगा में बिजनौर से लेकर नरौरा तक सर्वाधिक डालफिन कहीं पाई जाती है तो वह क्षेत्र गढ़ क्षेत्र है। इस डालफिन को मानव मित्र भी कहा जाता है। गंगा नगरी में आने वाले श्रद्धालुओं को गंगा की स्वच्छता की अलख जलाने के लिए मुख्य चौराहे पर लाखों रुपये की लागत से डालफिन की आकृति पत्थर की डालफिन लगाई गई, लेकिन लाखों की इस आकृति को अब कचरे ने घेर लिया है। इस संबंध में वन विभाग अधिकारी करन सिंह ने बताया कि टीम मौके पर भेजकर समस्या का समाधान कराया जाएगा।

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