लखनऊ, जून 17 -- कभी विलुप्त के कगार पर पहुंच चुके घड़ियाल वर्तमान में गंगा, गोमती, घाघरा, चंबल, गंडक, गेरुआ जैसी नदियों के सेहत सुधारने में जुटे हैं। इन नदियों में करीब आठ हजार घड़ियाल हैं, जिनका काम जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखना और नदी के स्वास्थ्य को बनाए रखना है। घड़ियाल केवल साफ और गहरे पानी वाली नदियों में ही जीवित रह सकते हैं, इसलिए इन्हें नदी की सेहत का प्राकृतिक संकेतक भी माना जाता है। बुधवार को विश्व मगरमच्छ दिवस के मौके पर कुकरैल स्थित घड़ियाल पुनर्वास केंद्र में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें एमिकस स्कूल के बच्चों को पर्यावरणम सोसाइटी की ओर से सरीसृपों की जैव-विविधता के बारे में बताया गया। गोमती टास्क फोर्स के प्रभारी युवराज थापा ने बताया कि बच्चों को विलुप्त हो रहे घड़ियाल को जलीय जीवन देकर नदी को साफ रखन...