कुशीनगर, मई 27 -- कुशीनगर। निज संवाददाता वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में मालिक वाईके झुनझुनवाला और उनके पुत्र के जेल जाने के बाद सुर्खियों में आई कप्तानगंज डिस्टलरी पिछले 18 वर्षों से बंद पड़ी है। वर्ष 2008 में इसकी चिमनी से आखिरी बार धुआं निकला था, लेकिन अब यह कभी एशियाई स्तर पर पहचान रखने वाली डिस्टलरी खंडहर में तब्दील हो चुकी है। बाहर से इसका ढांचा और चिमनी भले दिखाई देती हो, लेकिन अंदर से यह पूरी तरह खोखली हो चुकी है।

डिस्टलरी का इतिहास करीब 49 एकड़ भूमि में फैली इस डिस्टलरी की स्थापना साल 1944-45 में कोलकाता के प्रसिद्ध व्यवसायी सेठ इंदरचंद ने कराई थी। वर्ष 1962 में इसे सेठ इंदरचंद ने सोमैया ग्रुप को बेच दिया। सोमैया ग्रुप के दौर में डिस्टलरी की पहचान सोने का अंडा देने वाले कारखाने के रूप में होती थी। बाद में सोमैया ग्रुप ने परिस्थिति...