भदोही, मार्च 22 -- ज्ञानपुर, संवाददाता। अगार बोए गए गेहूं फसल की टाई शीघ्र ही शुरू हो जाएगी। ऐसे में किसान खेतों में बचा अवशेष कदापि न जलाएं। इससे पर्यावरण दूषित होने संग अगलगी की घटना बढ़ने के साथ मिट्टी की संरचना भी प्रभावित होगी। उप कृषि निदेशक डॉ. अश्वनी कुमार की माने तो खेत में फसल अवशेष जलाने की शिकायत मिली तो विभागीय स्तर से कार्रवाई की जाएगी। गेहूं कटाई के बाद अवशेष को खेत में जलाना हर स्तर से कृषकों के लिए नुकसानदेह कदम होगा। गेहूं फसल की कटाई कंबाईन हार्वेस्टर, रीपर एवं अन्य साधन से कुछ किसान करा लेते हैं। खेत में बचा अवशेष लोग जला देते हैं। ऐसा करने से प्रदूषण बढ़ता है। इतना ही नहीं मिट्टी की संरचना भी प्रभावित होता है। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के वैज्ञानिक डॉ. आरपी चौधरी की माने तो फसल अवशेष जलने से भूमि में उपलब्ध जैव विविधता...
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