खेत पर बेच देते आलू, कोल्ड में जेब से देना पड़ रहा भाड़ा
फिरोजाबाद, अक्टूबर 3 -- अरै कछु तो भाव बढ़ाए देओ, जा कोल्ड का भाड़ो ही डेढ़ सौ रुपयौ है। जब खेतन में आलू पड़ो थो तबऊ पांच सौ रुपया मिलत रहे। हमने तो तबऊ कहौ थो खेत पई जा बार बेच देवत हैं, कछु तो लागत मिलै, छुटका (छोटा बेटा) न मानौ। कहत रहा बाबू बाद में अच्छा भाव मिलेगौ। अब तो साढ़े चार सौ भी न मिलव रहे। ऊपर से जा कोल्ड का भाड़ौ और खेत से लावे में एक बोरे पर कछु नाए तो भी 15 से 20 रुपैया तो खर्चा बैठ गयो। अब एक कट्टे पर तीन सौ भी न मिलवे। लाखन का घाटो हो गवौ...। कुछ यही कहना था शुक्रवार को टूंडला के एक टोल पर आलू बेचने गए बुजुर्ग किसान का।
किसानों की चिंता दरअसल यह स्थिति सिर्फ एक बुजुर्ग की नहीं है। कोल्ड पर आलू बेचने वाले हर किसान की जुबां पर यही दर्द है। कोई अपने बच्चों को कोल्ड में आलू रखने के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है तो कोई खुद की ह...
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