मुजफ्फरपुर, अप्रैल 18 -- धरती पुत्रों की व्यथा: -सिंचाई के पारंपरिक साधन लुप्त, खेतों तक नहीं पहुंची बिजली-क्षतिपूर्ति के लिए सरकार का तय मानक पूरा करना होता मुश्किलमुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि।करीब एक दशक से जिले के किसान जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ कभी सूखा, कभी बाढ़ तो कभी प्राकृतिक आपदा के शिकार हो रहे हैं। नतीजतन किसानों को बार-बार नुकसान झेलना पड़ रहा है। बिहार सरकार ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए हर खेतों में पानी पहुंचाने की योजना चलाई। लेकिन, इस योजना का लाभ शत-प्रतिशत किसानों को नहीं मिल पाया। आज भी लोगों को डीजल पंपसेट का सहारा लेना पड़ता है।नदी में जलकुंभी और जलस्तर घटने से सिंचाई प्रभावितकुढ़नी के किसान दिलीप कुमार ठाकुर कहते हैं कि पहले परंपरागत सिंचाई की सुविधा थी, जिससे किसानों को काफी सहूलियत हो जाती थी। यह भी...