नई दिल्ली, जुलाई 22 -- विद्या महांबारे, प्रोफेसर, अर्थशास्त्र, जीएलआईएम भारत के नीति-निर्माताओं ने हाल ही में एक पुरानी बात दोहराई है- खेती-बाड़ी से युवा आबादी को बाहर किया जाए। आर्थिक नजरिये से यह सही है, खुशहाली का पारंपरिक रास्ता यही है कि देश की कामकाजी आबादी (वर्क फोर्स) खेती से निकलकर मैन्युफैक्चरिंग और फिर सेवा क्षेत्र में जाए। लेकिन युवाओं के मामले में यह बदलाव काफी हद तक हो चुका है। साल 2025 में भारत में खेती करने वाली आबादी की औसत उम्र 40 साल थी। पिछले दो दशकों में इसमें पांच साल की बढ़ोतरी हुई है। कुछ राज्यों में तो खेती करने वाली आबादी और भी ज्यादा उम्र की है। इसके उलट, सेवा क्षेत्र में काम करने वालों की औसत उम्र दो दशक पहले 35 साल थी, जो अब बस एक ज्यादा 36 साल है। यह जानकारी 'पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे' के डाटा पर आधारित है। ...