अलीगढ़, फरवरी 12 -- अलीगढ़। अंधेरा मिटा देने जैसे नारों के साथ बजट पेश किया, लेकिन जमीनी हकीकत किसानों और मजदूरों के लिए उलटी है। ये कहना है क्रांतिकारी किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव शशिकांत का। राष्ट्रीय महासचिव के मुताबिक पिछले वर्ष बजट में 21 प्रतिशत वृद्धि दिखाई गई थी, जबकि इस बार कुल बढ़ोतरी लगभग 13 प्रतिशत के आसपास सिमट गई है। कुल बजट व्यय में कृषि पर खर्च का अनुमान मात्र लगभग 11 प्रतिशत है, जो पहले के लगभग 19 प्रतिशत हिस्से की तुलना में काफी कम है। मुफ्त बिजली कागजों तक ही सीमित है। पहले से ही 1045 यूनिट प्रतिमाह से अधिक खपत वाले ट्यूबवेल कनेक्शनों पर बिल भेजे जा रहे हैं। जिले में बंद पड़ी साथा चीनी मिल को फिर से शुरू करने की उम्मीद भी इस बजट में टूट गई। स्थानीय किसानों को रोजगार, परिवहन और गन्ना खपत का जो लाभ मिल सकता था, उस प...