नई दिल्ली, मई 21 -- सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों खूंखार कुत्तों को मारने की अनुमति देकर बिल्कुल ही उचित फैसला सुनाया है। मानव जीवन सबसे ऊपर है और खूंखार कुत्तों को, जो इंसानों की जान ले रहे हैं, जीवित रहने देने का कोई औचित्य नहीं है। लगभग हर दिन कुत्ते द्वारा किसी-न-किसी की जान लेने की खबर आती ही है। इसमें ज्यादातर बच्चे और बुजुर्ग होते हैं। बच्चे और बुजुर्ग की हालत ऐसी होती है कि वे कुत्तों के हमले में भाग भी नहीं पाते। ऐसी कोई परिस्थिति, जो मानव जीवन पर खतरा पैदा करे, उसे खत्म कर देना ही उचित है। इसमें किसी तरह की शंका नहीं होनी चाहिए। पशुप्रेमी भी मानव जीवन को कुत्तों के हमले से बचाने के लिए कहां कुछ करते हैं। ऐसे में, खूंखार या कटखने कुत्तों को मार देना ही बेहतर है। इंसानों की जान लेने का हक किसी को नहीं है। शैलबाला कुमारी, गृहिणी आवा...