कुशीनगर, मार्च 25 -- सोहसा मठिया, हिन्दुस्तान संवाद।राष्ट्रीय राजमार्ग से दो किमी उत्तर हेतिमपुर-गोबरही मार्ग पर महुआडीह गांव के धूस पर विराजगान मां भगवती हमेशा खुले आसमान के नीचे रहना पसंद करती हैं। जो भी भक्त सच्चे मन से मां की आराधना करता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटा। कई सौ वर्षों से महुआडीह स्थान की भगवती लोगों के आस्था का केंद्र बनी हुआ है। श्रीराम नवमी मंदिर परिसर में विशाल मेला लगता है। उसकी तैयारी में भक्त जुटे हुए हैं।महुआडीह की भगवती का स्थान गण्डक नदी के समीप है। स्थानीय लोग बतातें है कि हजारों वर्ष पूर्व यहां पर थारू जाति के लोग निवास करते थे। मां भगवती उनकी कुल देवी थी। उस समय यहां पर घनघोर जंगल था, जहां दो पीपल के वृक्ष के नीचे मां भगवती निवास करती थी। थारुओं ने कुल देवी के सात पिंडी की स्थापना करायी और पास में ब्रह्मस्थान ...