महेश्वर सिंह, अप्रैल 19 -- होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव बरकरार है। ईरान ने एक बार फिर जल मार्ग को बंद कर दिया और दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग भी की। होर्मुज में भारत समेत कई देशों के जहाज फंसे हुए हैं। इन्हीं जहाजों में एक की कमान कैप्टन आशीष के कंधों पर है। 45 दिन से होर्मुज में फंसे होने के बावजूद उन्होंने मिसाल पेश की। जहाज में फंसे लोगों की जब वतन लौटने की बारी आई, तो उन्होंने कर्तव्य चुनते हुए खुद को जहाज पर डटे रखा और जहाज में 12 क्रू मेंबर को भारत रवाना किया। जब समुद्र की लहरें उग्र हों और अनिश्चितता का अंधेरा गहराने लगे, तब नेतृत्व की असली परीक्षा होती है। ऐसी ही कठिन परिस्थिति में उत्तराखंड के रुड़की निवासी कैप्टन आशीष शर्मा ने अपने निर्णयों से साबित किया कि समंदर की लहरों से बड़ी चुनौती होती है जिम्मेदारी और डर से बड़ा होता कर्तव्य...